दोहरे फॉर्मूले से फसलों को मिलेगा सुरक्षा कवच; बागवानी करने वाले किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा नया उत्पाद
खेती और बागवानी में फसलों की अच्छी बढ़त के लिए खरपतवार (घास) नियंत्रण हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। बार-बार उगने वाली अनचाही घास न केवल मिट्टी का पोषण सोख लेती है, बल्कि किसानों का समय और मेहनत भी बर्बाद करती है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बायर कंपनी ने अपना शक्तिशाली खरपतवार नाशक ‘एलियन प्लस’ (Alion Plus) पेश किया है। इस उत्पाद की सबसे क्रांतिकारी विशेषता यह है कि यह मौजूदा घास को खत्म करने के साथ-साथ अगले 4 से 6 महीनों तक नई घास को उगने से रोकने की क्षमता रखता है।
इंडाजीफ्लम और ग्लाइफोसेट का अनोखा संगम
एलियन प्लस की लंबी अवधि तक असर दिखाने की शक्ति इसके खास फॉर्मूले में छिपी है। इसमें इंडाजीफ्लम (Indaziflam) 20% और ग्लाइफोसेट (Glyphosate) 54% का सटीक मिश्रण किया गया है। छिड़काव के दौरान ग्लाइफोसेट खेत में मौजूद हरी घास को जड़ों से सुखा देता है, जबकि इंडाजीफ्लम जमीन की ऊपरी सतह पर एक अदृश्य सुरक्षा परत बना देता है। यह परत मिट्टी में दबे हुए घास के बीजों को अंकुरित होने से रोकती है, जिससे किसानों को बार-बार निंदाई-गुड़ाई और महंगे छिड़काव से मुक्ति मिल जाती है।
फलदार बागों के लिए विशेष रूप से उपयोगी
यह खरपतवार नाशक मुख्य रूप से फलदार वृक्षों जैसे संतरा, मौसंबी, नींबू, अनार, अंगूर और आम के बागों के लिए अत्यंत प्रभावी है। इसके इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि 15 से 20 लीटर के स्प्रे पंप में 100 मिलीलीटर दवा का घोल बनाना चाहिए। सामान्यतः एक एकड़ खेत के लिए 1 लीटर दवा पर्याप्त होती है। बेहतर परिणाम के लिए यह अनिवार्य है कि छिड़काव के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद हो, ताकि दवा अपना सुरक्षा कवच प्रभावी ढंग से बना सके। बाजार में इसके 1 लीटर के पैक की कीमत लगभग 2200 से 2300 रुपये के बीच है।
इस्तेमाल के दौरान सावधानियां और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
चूंकि एलियन प्लस एक अत्यंत शक्तिशाली रसायन है, इसलिए इसके उपयोग में कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दवा का उपयोग 1 वर्ष से कम उम्र के छोटे और कोमल पौधों पर नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, केला और पपीता जैसी संवेदनशील फसलों में इसका इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है। छिड़काव करते समय स्प्रे नोजल को हमेशा जमीन की ओर रखें ताकि दवा के कण मुख्य पेड़ की पत्तियों पर न पड़ें। यदि किसान इन नियमों का पालन करते हुए सही तरीके से छिड़काव करते हैं, तो वे अपनी श्रम लागत में भारी कटौती कर फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बढ़ा सकते हैं।